मेरी कलम से


 मेरी कलम से


साथियों,

आज का विषय है कि हम शिक्षकों का व्यक्तित्व विद्यालय में जो है क्या वही व्यवहार घर मे भी है?

एक शिक्षक की अपनी निजी जिंदगी है और वो कार्यछेत्र से भिन्न होती है। हर व्यक्ति चाहता है कि हमारे काम का असर हमारे निजी जीवन पर न पड़े। और निजी जीवन मे भी व्यक्ति आराम चाहता है और खुश रहना चाहता है इसलिए दोनों प्रकार के जीवन मे भिन्नता है। ये होना भी चहिए। 

पर प्रश्न ये है कि अगर आप निजी जीवन मे कुछ करते है , जैसे अगर आपके घर कोई आया और आप उसे चाय नाश्ता कराते है तो अच्छी बात है लेकिन वही आप आप विद्यालय में है तो ऐसा नही करते तो भिन्नता है। ये एक उदारण है इसी तरह मान लीजिए आपके के घर पर ढेर सारे पेड़ पौधे लगे है, छत पर गार्डन है, क्यारियों से सजा है घर लेकिन दूसरी तरफ आप ही के विद्यालय में आपका प्रयास शून्य है। अगर पेड़ पौधे लगे है तो उसमें उनका योगदान नही है। इस तरह के बहुत लोगों को मैं जानता हूँ जो घर पर बागवानी खूब करते है लेकिन वही विद्यालय में पेड़ पौधों से कोई प्रेम नही। दोनों व्यक्ति एक ही है लेकिन दोनों का व्यवहार पेड़ों के प्रति भिन्न है। घर के पेड़ उन्हें ज़्यादा आशीष देंगे और विद्यालय के पेड़ कम शायद इसी लिए ऐसा है। जो पेड़ पौधे नही लगाते उनका समझ आता है कि वो ऐसे ही है, unthankful व्यक्ति लेकिन जो दोहरे व्यक्तिव वाले ट्री लवर है वो तो उदारण है उदारण के लिए। 

मेरी कलम से में आज इतना ही। कटाक्ष के लिए क्षमा चाहेंगे लेकिन अगर बुरा लगे तो व्यक्तिव पर काम करें। एक तरह के व्यक्तित्व वाले का जीवन सुलभ और खुशहाली से भरा होता है। 



आपका साथी

आनन्द कुमार 

प्राथमिक विद्यालय चायल

कौशाम्बी।

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