समोसा
और कढाई ने
फोड़ दिया
समोसा।
लगा शोर मचने
यह क्यों
हो गया
?
कड़ाई का समोसे से
पंगा हो
गया .
कही दूर से
चाय ने
आवाज़ लगाई
कड़ाई का समोसे से
पंगा हो
गया ।
लफंगे कुकर ने
मारी सीटी
लगता है पूरे
मोहल्ले मे
हल्ला हो
गया
समोसा चाहता था
बर्फी को
पर बर्फी ने
उससे नजर
नहीं मिलाया।
कुछ दिन समोसे
के साथ
मठरी घूमी।
फिर मठरी ने
समोसे को
दे दीया
धोखा,
बेचारा समोसा जी
भर के
रोया।
आखिर मठरी का
दमालू से
रिश्ता हो
गया।
इसलिए कड़ाई का समोसे
से पंगा
हो गया ।
दिल एक और
टूटा गजल
गई समोसे
ने,
फिर भी मठरी
नहीं पिघली।
और बटता रहा
रसगुल्ला।
काश! थोड़ी रबडी
होती
तो और सजती
महफ़िल।
लेकिन आज ही
टुटा है
बेचारे समोसे का
दिल।
समोसे ने जलेबी से फरियाद लगाई
सीधी साधी तुम्हारी तरह कोई होती।
जो मुझे भी अपने साथ घुमाती।
धीरे धीरे जलेबी ने मीठी होती गई
और फिर वो भी फुर्र हो गई।
ना करना मोहब्बत
कहता है
समोसा
हर तरफ बस
धोखा ही धोखा।
किसी को मठरी
का धोखा
तो किसी को
बर्फी ने
छोड़ा।
बेफवाई का यहाँ भी किस्सा
जलेबी की तरह इश्क़ होता।
रोते रोते कहता है ये समोसा
हर तरफ बस
धोखा ही धोखा।
आनन्द।





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